
बारिश की पहली बूंदें गिरने लगीं। एक छोटा बच्चा खिड़की के पास बैठा था, उसके हाथ में एक सफेद काग़ज़ की शीट थी। बाहर हरियाली थी, और बच्चे की आँखों में चमक थी।

बच्चे ने काग़ज़ को मोड़ा और एक प्यारी सी काग़ज़ की नाव बना ली। नाव पर उसने रंग-बिरंगे चित्र बनाए। बारिश रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी, पर बच्चा बहुत खुश था।

जैसे ही बारिश थोड़ी धीमी हुई, बच्चा अपनी काग़ज़ की नाव लेकर बाहर दौड़ गया। वहाँ एक छोटा सा पानी का तालाब बन गया था, जिसमें पानी चमक रहा था।

बच्चे ने धीरे से अपनी काग़ज़ की नाव पानी में तैराई। नाव पानी की लहरों पर मस्ती से झूमने लगी। बच्चा तालियाँ बजा रहा था, और उसकी हँसी भी बारिश में मिल गई।

अचानक एक हल्की हवा चली, और नाव थोड़ा दूर बहने लगी। बच्चा दौड़ता रहा, नाव के पीछे-पीछे उछलता-कूदता गया। उसे ऐसा लगा जैसे उसकी नाव भी उसकी सबसे अच्छी दोस्त है।

आखिरकार नाव रुक गई। बच्चा भी पास आ गया और बोला, "तुम्हारे साथ खेलना कितना मज़ेदार है!" उसकी आँखों में दोस्ती और खुशी की चमक थी। बारिश थम गई, पर बच्चे और उसकी काग़ज़ की नाव की दोस्ती हमेशा के लिए यादगार बन गई।


