
मनीष हर सुबह गाँव की गलियों में निकलता और रास्ते में बैठे प्यासे कुत्तों को प्यार से दूध पिलाता।

गाँव के लोग अक्सर उसकी दयालुता का मज़ाक उड़ाते और कहते, 'जानवरों पर इतना क्यों खर्च करता है?'

एक दिन गाँव में अचानक आग लग गई, लोग डर के मारे इधर-उधर भागने लगे।

उसी समय, वही कुत्ते दौड़कर गाँव वालों के पास पहुँचे और भौंकते हुए उन्हें सुरक्षित रास्ता दिखाने लगे।

गाँव के सभी लोग सुरक्षित जगह पहुँच गए और सबने देखा कि जिन पर दया की जाती है, वे वक़्त पर दया लौटाते हैं।


