
राधा अपनी छोटी थाली में थोड़ा सा दूध और एक रोटी का आख़िरी टुकड़ा लेकर आँगन में बैठी थी। उसके पास उसका दोस्त, भूरे बालों वाला बच्चा, बैठा था, जिसकी आँखों में भूख और जिज्ञासा थी।

राधा ने देखा कि उसके पास बस एक ही टुकड़ा बचा है, लेकिन उसके मन में चिंता थी कि क्या वह अकेले खा ले या सबके साथ बाँटे। उसकी आँखों में दया चमक उठी।

वह मुस्कुराई और बोली, "चलो, हम इसे आधा-आधा बाँट लेते हैं।" दोनों ने मिलकर रोटी का टुकड़ा तोड़ा और एक-दूसरे को हिस्सा दिया।

तभी राधा का छोटा भाई भी वहाँ आ गया, उसकी आँखों में भी उम्मीद थी। राधा ने अपने हिस्से से थोड़ा-सा टुकड़ा भाई को दे दिया।

राधा के इस दयालु व्यवहार से सब खुश हो गए। दोस्तों और परिवार ने मिलकर रोटी और दूध को बाँटकर खाया, सबके चेहरे पर मुस्कान आ गई।

राधा ने महसूस किया कि खुशी बाँटने में ही है। उसने सीखा कि जब हम बाँटते हैं, तो प्यार और दोस्ती दोनों बढ़ती हैं।


