
सिद्धार्थ एक छोटे से गाँव में रहता था। वह एक प्यारा बच्चा था। उसकी दादी हमेशा उसे कहानियाँ सुनाती थीं। वह अपनी दादी को बहुत याद करता था।

एक दिन, सिद्धार्थ ने अपनी दादी के लिए एक चिट्ठी लिखने का सोचा। उसने एक कागज़ लिया और अपनी भावनाएँ लिखने लगा। चिट्ठी अधूरी थी।

सिद्धार्थ ने चिट्ठी में लिखा, 'दादी, मुझे आपकी बहुत याद आती है। आप हमेशा मेरे साथ होती थीं। मुझे आपके साथ खेलना बहुत अच्छा लगता था।'

लेकिन वह चिट्ठी कभी पूरी नहीं हो पाई। सिद्धार्थ सोचता रहा कि क्या लिखे। उसकी आँखों में आँसू थे। उसने सोचा, 'क्या मैं आपको फिर से देख सकूँगा?'

सिद्धार्थ ने चिट्ठी को एक पेड़ के नीचे रखा। उसने सोचा कि दादी इसे पढ़ेंगी। उसकी यादें हमेशा उसके साथ रहेंगी। चिट्ठी एक याद बन गई।

सिद्धार्थ ने चिट्ठी को पढ़ा और मुस्कुराया। उसने समझा कि प्यार कभी खत्म नहीं होता। अधूरी चिट्ठी भी एक कहानी होती है। यादें हमेशा जिंदा रहती हैं।


