
मीरा एक छोटी लड़की थी, जिसके घुंघराले काले बाल और बड़ी जिज्ञासु आँखें थीं। एक रात, जब सब सो रहे थे, मीरा अपने कमरे में अकेली थी और बाहर अंधेरा छाया हुआ था।

अचानक मीरा की नजर अलमारी के ऊपर रखी एक छोटी, गोल पीतल की दीपक पर पड़ी। दीपक की चमकीली लौ हल्की-हल्की रोशनी फैला रही थी, जिससे मीरा को थोड़ी राहत मिली।

मीरा ने दीपक को ध्यान से देखा। दीपक के चारों ओर हल्की रोशनी की आभा थी और उस पर सुंदर फूलों की नक्काशी बनी हुई थी, जैसे वह खुद मुस्कुरा रही हो।

थोड़ी देर बाद, मीरा ने दीपक को अपने पास उठा लिया। दीपक की गरमाहट और चमक से मीरा का डर धीरे-धीरे कम होने लगा। उसे अहसास हुआ कि छोटी सी रोशनी भी बड़ा अंधेरा दूर कर सकती है।

मीरा ने दीपक से कहा, तुम मेरी दोस्त बनोगी? दीपक की लौ और तेज़ चमकने लगी, जैसे वह मीरा की दोस्ती को स्वीकार कर रही हो। अब मीरा को अंधेरे से डर नहीं लग रहा था।

उस रात मीरा ने दीपक के साथ मिलकर अपने डर को दूर किया। मीरा और छोटी दीपक अब सबसे अच्छे दोस्त बन गए, और हर रात वे मिलकर अपने कमरे में रोशनी और हिम्मत फैलाते हैं।


