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एक छोटे से गाँव में रात का अंधेरा धीरे-धीरे गहराता जा रहा था। हर घर के बाहर रखे दीये एक-एक कर बुझ रहे थे, बस एक आख़िरी दीया अब भी जल रहा था।
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आख़िरी दीया बहुत छोटा था, लेकिन उसकी लौ सुनहरी और नारंगी रंग की थी। दीये की मिट्टी पर रंग-बिरंगे फूलों की सजावट थी और उसकी हल्की दरारें उसे और भी खास बनाती थीं।
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गाँव के बच्चे डरे हुए थे क्योंकि अंधेरा बढ़ गया था। वे आख़िरी दीये के पास आकर बैठ गए और उसकी रोशनी में खुद को सुरक्षित महसूस करने लगे।
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गाँव के बच्चे डरे हुए थे क्योंकि अंधेरा बढ़ गया था। वे आख़िरी दीये के पास आकर बैठ गए और उसकी रोशनी में खुद को सुरक्षित महसूस करने लगे।
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बच्चे दीये की बात सुनकर मुस्कुराए। उन्होंने मिलकर दीये की बाती को और सीधा किया, जिससे लौ और भी चमकीली हो गई। सभी को एक साथ देखकर दीया और भी तेज़ जलने लगा।
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उस रात गाँव के बच्चे समझ गए कि उम्मीद और अच्छाई की रोशनी हमेशा साथ रहती है। आख़िरी दीये की तरह वे भी अब दूसरों को प्रेरणा देने लगे और गाँव में फिर से खुशी छा गई।
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