
एक छोटा पौधा है। यह सूखा है। इसकी पत्तियाँ मुरझाई हैं। सिया उसे देखती है।

सिया सोचती है, "मुझे इस पौधे की देखभाल करनी है।" वह पौधे को पानी देती है।

सिया पौधे को धूप में रखती है। वह प्यार से कहती है, "मैं तुम्हें ठीक करूँगी।"

पौधा धीरे-धीरे हरा होता है। उसकी पत्तियाँ फिर से खिलती हैं। सिया खुश होती है।

सिया पौधे को रोज़ देखती है। वह उसे प्यार से छूती है। पौधा और बड़ा होता है।

अब पौधा बड़ा हो चुका है। वह हरा और सुंदर है। सिया ने देखभाल करना सीखा।


