
एक छोटे से गाँव के पास, एक घना जंगल था। उस जंगल के बीचोंबीच एक विशाल, प्राचीन बरगद का पेड़ था, जिसकी घनी जटाएँ ज़मीन तक लटकती थीं। हर कोई कहता था कि वह पेड़ कुछ रहस्यमय फुसफुसाता है।

छोटा सा बालक अर्जुन रोज़ उस पेड़ के नीचे खेलने जाता था। एक दिन, जब हवा धीमे-धीमे बह रही थी, अर्जुन ने पेड़ की जड़ों के पास बैठकर उसकी फुसफुसाहट सुनी।

पेड़ ने बहुत कोमल आवाज़ में अर्जुन से कहा, "क्या तुम जंगल की कहानी सुनना चाहोगे? यहाँ हर पत्ता, हर बेल कुछ कहती है।" अर्जुन ने हैरान होकर सिर हिलाया।

बरगद की शाखाएँ धीरे-धीरे लहराईं और उसने अर्जुन को बताया, "हम पेड़, धरती और जानवर सब एक दूसरे के मित्र हैं। अगर जंगल सुरक्षित रहेगा, तो सब खुश रहेंगे।"

अर्जुन ने पेड़ से पूछा, "मैं जंगल की मदद कैसे कर सकता हूँ?" पेड़ ने फुसफुसाकर कहा, "कभी किसी पेड़ को बिना वजह मत काटो, और जानवरों को परेशान मत करो। प्रकृति से प्यार करो।"

अर्जुन मुस्कराया और पेड़ के तने को गले लगा लिया। उस दिन से वह जंगल का सच्चा मित्र बन गया। पेड़ की रहस्यमय फुसफुसाहट उसके दिल में हमेशा गूंजती रही।


