
एक दिन, एक छोटा सा बच्चा था। उसका नाम था मोहन। मोहन को आईने में देखना बहुत पसंद था।

मोहन ने एक दिन सोचा, 'आईने में क्या है?' उसने आईने के पास जाकर देखा।

आईने में मोहन ने एक अजीब सी आकृति देखी। वह आकृति हंस रही थी।

मोहन ने पूछा, 'तुम कौन हो?' आकृति ने कहा, 'मैं तुम्हारी कल्पना हूँ।'

मोहन ने सोचा, 'क्या मैं भी तुम्हारी तरह हंस सकता हूँ?' और उसने हंसने की कोशिश की।

मोहन ने सीखा कि हंसना अच्छा होता है। उसने अपने दोस्तों को बुलाया और सबने मिलकर हंसकर खेला।


